जुबिलीन्यूज़ब्यूरो
लखनऊ. ओरल एंड मक्सिलोफेसिअल सर्जरी विभाग में नवीनतम तकनीक से निचले जबड़े की सर्जरी की गयी,ये सर्जरी विभाग के विभागअध्यक्ष प्रोफेसर जीतेंद्र कुमार अरोरा और उनकी विशेष टीम (डा पारुल टंडन, डा हिमांशु चौहान,डा शमिता दुबे,डा अमर्त्य प्रकाश,डा मोहित सक्सेना आदि ) की देखरेख में,विभाग के ही प्रोफेसर और प्रिंसिपल डा. के. एन. दुबे के कुशल निर्देशन में संपादित हुई.
आजकल कम उम्र के मरीजों में जबड़ों को बदलने के लिए सीमित विकल्प हैं जो दुर्घटना, घाव, या किसी बीमारी (ट्यूमरआदि) से खराब हो गये हों और संक्रमित हो चुके हों.संस्थान में कृत्रिम जबड़ा जो टाइटेनियम का बना था, एक कम उम्र (२२) के मरीज में प्रत्यारोपित किया गया. पी एस आई एक अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय तकनीक है जिसमें से सी. टी. स्कैन और थ्री डी स्कैनिंग तकनीक से एकदम सही आकर का जबड़ा बनाया जाता है और बाद में उसमें दांत भी लगा दिए जाते हैं. ये सर्जरी ६-८ घंटे तक चलती है और लगभग हफ्तेभर बाद ही रोगी पूरी तरह से सामान्य जीवन व्यतीत करता है.
कम उम्र के मरीजों का जबड़ा बदलने की ज़रूरत जब भी महसूस की जाती है तो डॉक्टरों के पास बहुत सीमित विकल्प होते हैं. जिन मरीजों के जबड़े दुर्घटना या फिर ट्यूमर आदि की वजह से खराब हो जाते हैं उनका जबड़ा बदलने की ज़रूरत होती है.
सरस्वती डेंटल कालेज में एक 22 साल का मरीज़ भर्ती हुआ था. इस मरीज़ का जबड़ा प्रत्यारोपित किया जाना था. डॉक्टरों की इस टीम ने टाइटेनियम का बना जबड़ा इस मरीज़ प्रत्यारोपित किया. यह एक विश्वस्तरीय तकनीक है.
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